♥गीले काग़ज़ की तरह ज़िंदगी अपनी

कोई जलाता नही और बहाता भी नही

इस कदर अकेले हो गये हैं आज कल

कोई सताता भी नही और मनाता भी नही
♥इस कदर गम ने हमे लूटा हे आँसू तक ने हमारा साथ छोड़ा है सभी है बेदर्द यहाँ ज़माने में जिसे दिल मे बसाया उसी ने दिल तोड़ा हे ..open
इस दिल को किसी की आस रहती है, निगाहों को किसी सूरत की प्यास रहती है, तेरे बिना किसी चीज़ की कमी तो नही, पर तेरे बेगैर जिन्दगी बड़ी उदास रहती है ..open

आप को पाकर अब खोना नहीं चाहते इतना खुश होकर अब रोना नहीं चाहते ये आलम है हमारा आप की जुदाई में आँखों में है नींद पर सोना नहीं चाहते

..open

♥इबादतो की तरह में ये काम करती हू सबसे पहले तुम्हे याद करती हू खुदा ने दिया हे यह इश्क़ का नूर यॅ सलतनत मैं तुम्हारे नाम करती हू ..open
हमने सुना हैं की मासूम दुआओं की कोई भी कीमत नहीं होती, फिर भी आजकल कारोबार खूब चलता हैं इसका ….. वक़्त अच्छा हो तो आपकी बड़ी गलती भी छोटा सा मज़ाक लगती है और वक़्त खराब हो तो छोटा मज़ाक भी बड़ी गलती बन जाती हैं…. ..open
शिद्दत-इ-तालाब से उसने मुझे चाहा , पहेले अपनाया, और फिर छोड़ दिया, कितनी मेहनत की है उस हसीन शख्स ने मेरा ये पाक दिल दुखने के लिए ..open

कोई तो दिल का भी सहारा होता है; ज़रूरी नहीं ज़िन्दगी अपने लिए ही प्यारी हो; ज़िन्दगी में कोई तो ज़िन्दगी से भी प्यारा होता है ..open
♥गीले काग़ज़ की तरह ज़िंदगी अपनी कोई जलाता नही और बहाता भी नही इस कदर अकेले हो गये हैं आज कल कोई सताता भी नही और मनाता भी नही ..open
फुर्सत नहीं उन्हें हमसे कुछ बातें करने की, इसलिए अब हम हर वक़्त खामोश रहते हैं ..open

.कोई वादा नहीं फिर भी तेरा इंतजार है जुदाई के बाद भी हमें तुझसे प्यार है तेरे चेहरे की उदासी कर रही है बयान दास्ताँ की मुझसे मिलने के लिए तू भी बेक़रार है

..open
न थी जिसको मेरे प्यार की कदर, इत्तेफ़ाक़ से उसी को छह रहा था मैं, उसी दिए ने जलाया मेरे हाथों को, जिसको हवा से बचा रहा था मैं ..open
♥फ़िज़ा मे महकती शाम हो तुम प्यार मे कहकता जाम हो तुम तुम्हे दिल मे छुपाए फिरते हे ए दोस्त मेरी ज़िंदगी का दूसरा नाम हो तुम ..open

♥हर तरफ यादो का शमा हे तेरा प्यार आज भी मेरे दिल मे जवा हे और तो सब कुछ मिल गया मुझे, ज़िंदगी में मगर तेरे प्यार को आज भी तरसे ये जिस्म और जाँ है ..open
इसे इत्तेफ़ाक़ कहू या मेरे दर्द की हकीकत, ए बेवफा सनम, आँख जब भी नम हुई वज़ह तुम ही निकले. ..open
♥इश्क़ कर देता हे बेकरार भर देता हे पत्थर के दिल में प्यार' हर एक को नही मिलती ज़िंदगी की ये बाहर क्यूकी इश्क़ का दूसरा नाम हे इंतेज़ार ..open

फुर्सत नहीं उन्हें हमसे कुछ बातें करने की, इसलिए अब हम हर वक़्त खामोश रहते हैं ..open
♥हर घड़ी सोचते हे भलाई तेरी सुन नही सकते बुराई तेरी हस्ते हस्ते रो पड़ती है आँखें मेरी इस तरह से सहते हे जुदाई तेरी ..open
♥फास्लो से इंतेज़ार बड़ा करता हे इंतेज़ार से प्यार ना बड़ा करता हे सारी ज़िंदगी खुदा से सजदा करो तब जा के तुम्हारे जैसा यार मिला करता हे ..open

मुझसे नफरत ही करनी है तो इरादे मजबूत रखना; जरा से भी चूक हुई तो मोहब्बत हो जायेगी। ..open
♥इबादतो की तरह में ये काम करती हू सबसे पहले तुम्हे याद करती हू खुदा ने दिया हे यह इश्क़ का नूर यॅ सलतनत मैं तुम्हारे नाम करती हू ..open

अपनी राय अवश्य दे X