दिल तो करता है जिंदगी को किसी कातिल के हवाले कर दू जुदाई में यूँ रोज रोज का मरना मुझे अच्छा नहीं लगता

ये कैसी जुदाई है जिसने हमें शायर बना दिया ये कैसा गम है जिसने हमें बेबस बना दिया सोचा नहीं था जुदा हो जाओगे हमसे कभी करते भी क्या जब आप ने ही गैर बना दिया

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हो जुदाई का शबाब कुछ भी मगर हम उसे अपनी खता कहते है वो तो सांसो में ढली है मेरे जाने क्यों लोग उसे मुझसे जुदा कहते है ..open
बिछड़ कर आपसे हमको ख़ुशी अच्छी नहीं लगती लबों पर ये बनावट की हंसी अच्छी नहीं लगती कभी तो खूब लगती थी मगर ये सोचती हूँ अब की मुझको क्यों मेरी ये जिंदगी अच्छी नहीं लगती ..open

खूबसूरत है जिंदगी ख्वाब की तरह जाने कब टूट जाये कांच की तरह मुझे ना भूलना किसी बात की तरह अपने दिल में ही रखना खूबसूरत याद की तरह ..open

आपकी याद दिल को बेक़रार करती है नजर तलाश आपको बार बार करती है गिला नहीं जो हम है दूर आपसे हमारी तो जुदाई भी आपसे प्यार करती है

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तुम्हारा दुःख हम सह नहीं सकते भरी महफ़िल में कुछ कह नहीं सकते हमारे गिरते हुए आंसूओ को पढ़ कर देखो वो भी कहते है की हम आपके बिना रह नहीं सकते

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.मौत ने तो नहीं जिंदगी ने बहुत सताया है तुझे जितना भूले तू उतना ही याद आया है तू क्यों इस बात को अक्सर भूल जाता है बरसों मिन्नतों के बाद तुझे पाया है ..open
जुबान खामोश आँखों में नमी होगी यही बस एक दास्ताँ जिंदगी की होगी भरने को तो हर जख्म भर जायेगा लेकिन कैसे भरेगी वो जगह जहाँ उसकी कमी होगी ..open
ना वो आये और ना कोई उनका पैगाम आया इंतजार में आपने तड़पा कर हमें है रुलाया हमसे खता हुई अगर कोई तुम बता तो देते ऐसी भी क्या नाराजगी थी जो हमें आपने भुलाया ..open

तमन्ना से नहीं तन्हाई से डरते है प्यार से नहीं रुस्वाई से डरते है मिलने की चाहत तो बहुत है मगर मिलन के बाद की जुदाई से डरते है ..open
जाने किस बात की मुझको सजा देता है मेरी हंसती हुई आँखों को रुला देता है एक मुद्दत से खबर भी नहीं तेरी कोई इस तरह भी क्या अपने प्यार को भुला देता है ..open
ऐ जिंदगी काश तू ही रूठ जाती मुझसे ये रूठे हुए लोग मुझसे मनाये नहीं जाते ..open

मजबूरी में जब कोई किसी से जुदा होता है, ये तो ज़रूरी नहीं कि वो बेवफ़ा होता है, देकर वो आपकी आँखों में जुदाई के आँसू, तन्हाई में वो आपसे भी ज्यादा रोता है। ..open
कैसे गुजरती है मेरी हर एक शाम तेरे बगैर अगर तू देख ले तो कभी तन्हा ना छोड़ती मुझे ..open
भूले है रफ्ता रफ्ता उन्हें मुद्दतों में हम किश्तों में खुदखुशी का मज़ा हमसे पूछिये ..open

उदास ना बैठो फ़िज़ा तंग करेगी गुजरे हुए लम्हों की सजा तंग करेगी किसी को ना लाओ दिल के इतना करीब क्यों की उसके जाने के बाद उसकी हर अदा तंग करेगी ..open
कट ही गयी जुदाई भी कब ये हुआ की मर गए तेरे भी दिन गुजर गए मेरे भी दिन गुजर गए ..open
सजा ना दो मुझे बेक़सूर हूँ मैं थाम लो मुझको गमो से चूर हूँ मैं तेरी दुरी ने कर दिया है पागल सा मुझे और लोगो का कहना है की मगरूर हूँ मैं ..open

आज जरुरत है जिसकी वो पास नहीं है अब उनके दिल में वो एहसास नहीं है तड़पते है दो पल बात करने को शायद अब वक़्त हमारे लिए उनके पास नहीं है ..open
लोग लेते है यूँ ही शम्मा और परवाने का नाम कुछ नहीं है इस जहाँ में ग़ुम के अफ़साने का नाम ..open

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