भूले है रफ्ता रफ्ता उन्हें मुद्दतों में हम किश्तों में खुदखुशी का मज़ा हमसे पूछिये
जाने किस बात की मुझको सजा देता है मेरी हंसती हुई आँखों को रुला देता है एक मुद्दत से खबर भी नहीं तेरी कोई इस तरह भी क्या अपने प्यार को भुला देता है ..open
ना वो आये और ना कोई उनका पैगाम आया इंतजार में आपने तड़पा कर हमें है रुलाया हमसे खता हुई अगर कोई तुम बता तो देते ऐसी भी क्या नाराजगी थी जो हमें आपने भुलाया ..open
कैसे गुजरती है मेरी हर एक शाम तेरे बगैर अगर तू देख ले तो कभी तन्हा ना छोड़ती मुझे ..open

किसी से जुदा होना इतना आसान होता तो, जिस्म से रूह को लेने फ़रिश्ते नहीं आते

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अब कौन से मौसम से कोई आस लगाये बरसात में भी याद ना जब उनको हम आये ..open
तमन्ना से नहीं तन्हाई से डरते है प्यार से नहीं रुस्वाई से डरते है मिलने की चाहत तो बहुत है मगर मिलन के बाद की जुदाई से डरते है ..open

बिछड़ कर आपसे हमको ख़ुशी अच्छी नहीं लगती लबों पर ये बनावट की हंसी अच्छी नहीं लगती कभी तो खूब लगती थी मगर ये सोचती हूँ अब की मुझको क्यों मेरी ये जिंदगी अच्छी नहीं लगती ..open
उदास ना बैठो फ़िज़ा तंग करेगी गुजरे हुए लम्हों की सजा तंग करेगी किसी को ना लाओ दिल के इतना करीब क्यों की उसके जाने के बाद उसकी हर अदा तंग करेगी ..open
सजा ना दो मुझे बेक़सूर हूँ मैं थाम लो मुझको गमो से चूर हूँ मैं तेरी दुरी ने कर दिया है पागल सा मुझे और लोगो का कहना है की मगरूर हूँ मैं ..open

खूबसूरत है जिंदगी ख्वाब की तरह जाने कब टूट जाये कांच की तरह मुझे ना भूलना किसी बात की तरह अपने दिल में ही रखना खूबसूरत याद की तरह ..open
कट ही गयी जुदाई भी कब ये हुआ की मर गए तेरे भी दिन गुजर गए मेरे भी दिन गुजर गए ..open
आज जरुरत है जिसकी वो पास नहीं है अब उनके दिल में वो एहसास नहीं है तड़पते है दो पल बात करने को शायद अब वक़्त हमारे लिए उनके पास नहीं है ..open

मजबूरी में जब कोई किसी से जुदा होता है, ये तो ज़रूरी नहीं कि वो बेवफ़ा होता है, देकर वो आपकी आँखों में जुदाई के आँसू, तन्हाई में वो आपसे भी ज्यादा रोता है। ..open
भूले है रफ्ता रफ्ता उन्हें मुद्दतों में हम किश्तों में खुदखुशी का मज़ा हमसे पूछिये ..open

तुम्हारा दुःख हम सह नहीं सकते भरी महफ़िल में कुछ कह नहीं सकते हमारे गिरते हुए आंसूओ को पढ़ कर देखो वो भी कहते है की हम आपके बिना रह नहीं सकते

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ये कैसी जुदाई है जिसने हमें शायर बना दिया ये कैसा गम है जिसने हमें बेबस बना दिया सोचा नहीं था जुदा हो जाओगे हमसे कभी करते भी क्या जब आप ने ही गैर बना दिया

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.मौत ने तो नहीं जिंदगी ने बहुत सताया है तुझे जितना भूले तू उतना ही याद आया है तू क्यों इस बात को अक्सर भूल जाता है बरसों मिन्नतों के बाद तुझे पाया है ..open
ऐ जिंदगी काश तू ही रूठ जाती मुझसे ये रूठे हुए लोग मुझसे मनाये नहीं जाते ..open

हो जुदाई का शबाब कुछ भी मगर हम उसे अपनी खता कहते है वो तो सांसो में ढली है मेरे जाने क्यों लोग उसे मुझसे जुदा कहते है ..open
दिल तो करता है जिंदगी को किसी कातिल के हवाले कर दू जुदाई में यूँ रोज रोज का मरना मुझे अच्छा नहीं लगता ..open

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